आस्थाबिहार
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आज भारत से संस्कार लुप्त होते जा रहे हैं आज के लड़का लड़की माता-पिता से भी संकोच शर्म नहीं करते। 

शिवाजीनगर । आज भारत से संस्कार लुप्त होते जा रही हैं आज के लड़का लड़की माता-पिता से भी संकोच शर्म नहीं करते संस्कृति समाप्त होती जा रही है। उक्त बातें प्रखंड के चितौड़ा गांव के महावीर मंदिर के प्रांगण में श्रीमद् भागवत कथा के साचवें दिन कथावाचक वेदव्यास जी महाराज ने कही उन्होंने कहा भगवान श्री कृष्ण और रुकमणी विवाह के बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन की उन्होंने कहा क्या चाल अलबेली है श्याम चले रस्ते रस्ते हाथी मदमस्त होकर चली पर श्याम चले हंसते-हंसते।  उन्होंने कहा भगवान से प्रेम करने वाले सच्चे भक्त उन्हें दिल से पुकारता है तो वह दौड़े दौड़े चले आते हैं उन्होंने कथा में भगवान श्री कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न को समरा सुर नामक असुर द्वारा उनके पुत्र को समुद्र में डाल दिए जाने और समरा सुर का अंत भगवान के पुत्र प्रद्युम्न के द्वारा किए जाने की विस्तार पूर्वक चर्चा की। कहां किसी भी अत्याचारी को भगवान ने नहीं बख्शा भगवान श्री कृष्ण ने पृथ्वी पर राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों को अंत कर शांति,भाईचारा,एकरूकता काइम की कथा के दौरान गांव के गणमान्य लोगों को चादर प्रदान कर सम्मानित किया गया। जिसमें स्थानीय मुखिया गजेंद्र प्रसाद सिंह, राम शगुन मंडल, कुशेश्वर सिंह, विनय कुमार, शिव शंकर मंडल, आयोजक वरुण कुमार मंडल, जामुन यादव, अर्जुन मंडल, रामाकांत मंडल सहित अन्य लोगों को सम्मानित किया गया।मौके पर छोटे भूरा ठाकुर, गोविंद जी महाराज, विक्रम जी महाराज झांकी नायक, लेखराज जी महाराज,विनय तिवारी, विकास राजपूत,गंगाराम मंडल,शंकर कुमार, राम करण मंडल, सहित अन्य को सम्मानित किया गया। समाचार के साथ कथा वाचन करते कथा वाचक वेदव्यास जी महाराज, झाँकी एवं सम्मानित करने की फोटो संलग्न है।

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